महाभारत 3.266.62
कुशलं त्वाब्रवीद्रामः सीते सौमित्रिणा सहसखिभावाच्च सुग्रीवः कुशलं त्वानुपृच्छति
kuśalaṃ tvābravīdrāmaḥ sīte saumitriṇā sahasakhibhāvācca sugrīvaḥ kuśalaṃ tvānupṛcchati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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