महाभारत 3.267.18
प्रबभौ हरिसैन्यं तच्छालतालशिलायुधम्सुमहच्छालिभवनं यथा सूर्योदयं प्रति
prababhau harisainyaṃ tacchālatālaśilāyudhamsumahacchālibhavanaṃ yathā sūryodayaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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