महाभारत 3.267.22द्वितीयसागरनिभं तद्बलं बहुलध्वजम्वेलावनं समासाद्य निवासमकरोत्तदाdvitīyasāgaranibhaṃ tadbalaṃ bahuladhvajamvelāvanaṃ samāsādya nivāsamakarottadāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें