महाभारत 3.267.4
षष्टिकोटिसहस्राणि प्रकर्षन्प्रत्यदृश्यतगोलाङ्गूलो महाराज गवाक्षो भीमदर्शनः
ṣaṣṭikoṭisahasrāṇi prakarṣanpratyadṛśyatagolāṅgūlo mahārāja gavākṣo bhīmadarśanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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