महाभारत 3.267.52
तत्रास्तां रावणामात्यौ राक्षसौ शुकसारणौचारौ वानररूपेण तौ जग्राह विभीषणः
tatrāstāṃ rāvaṇāmātyau rākṣasau śukasāraṇaucārau vānararūpeṇa tau jagrāha vibhīṣaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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