महाभारत 3.268.22
कोसलेन्द्रमथाभ्येत्य सर्वमावेद्य चाङ्गदःविशश्राम स तेजस्वी राघवेणाभिनन्दितः
kosalendramathābhyetya sarvamāvedya cāṅgadaḥviśaśrāma sa tejasvī rāghaveṇābhinanditaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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