महाभारत 3.268.39
सौमित्रिरपि नाराचैर्दृढधन्वा जितक्लमःआदिश्यादिश्य दुर्गस्थान्पातयामास राक्षसान्
saumitrirapi nārācairdṛḍhadhanvā jitaklamaḥādiśyādiśya durgasthānpātayāmāsa rākṣasān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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