महाभारत 3.268.3
अगाधतोयाः परिखा मीननक्रसमाकुलाःबभूवुः सप्त दुर्धर्षाः खादिरैः शङ्कुभिश्चिताः
agādhatoyāḥ parikhā mīnanakrasamākulāḥbabhūvuḥ sapta durdharṣāḥ khādiraiḥ śaṅkubhiścitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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