महाभारत 3.268.9
स समासाद्य पौलस्त्यममात्यैरभिसंवृतम्रामसंदेशमामन्त्र्य वाग्मी वक्तुं प्रचक्रमे
sa samāsādya paulastyamamātyairabhisaṃvṛtamrāmasaṃdeśamāmantrya vāgmī vaktuṃ pracakrame
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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