महाभारत 3.270.14
ततस्तमतिकायेन साश्वं सरथसारथिम्धूम्राक्षमवधीद्धीमान्हनूमान्मारुतात्मजः
tatastamatikāyena sāśvaṃ sarathasārathimdhūmrākṣamavadhīddhīmānhanūmānmārutātmajaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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