महाभारत 3.270.23
एष तीर्त्वार्णवं रामः सेतुना हरिभिः सहअवमन्येह नः सर्वान्करोति कदनं महत्
eṣa tīrtvārṇavaṃ rāmaḥ setunā haribhiḥ sahaavamanyeha naḥ sarvānkaroti kadanaṃ mahat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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