महाभारत 3.270.24
मया ह्यपहृता भार्या सीता नामास्य जानकीतां मोक्षयिषुरायातो बद्ध्वा सेतुं महार्णवे
mayā hyapahṛtā bhāryā sītā nāmāsya jānakītāṃ mokṣayiṣurāyāto baddhvā setuṃ mahārṇave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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