महाभारत 3.270.25
तेन चैव प्रहस्तादिर्महान्नः स्वजनो हतःतस्य नान्यो निहन्तास्ति त्वदृते शत्रुकर्शन
tena caiva prahastādirmahānnaḥ svajano hataḥtasya nānyo nihantāsti tvadṛte śatrukarśana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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