महाभारत 3.270.6
तस्य मेघोपमं सैन्यमापतद्भीमदर्शनम्दृष्ट्वैव सहसा दीर्णा रणे वानरपुंगवाः
tasya meghopamaṃ sainyamāpatadbhīmadarśanamdṛṣṭvaiva sahasā dīrṇā raṇe vānarapuṃgavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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