महाभारत 3.270.7
ततस्तान्सहसा दीर्णान्दृष्ट्वा वानरपुंगवान्निर्याय कपिशार्दूलो हनूमान्पर्यवस्थितः
tatastānsahasā dīrṇāndṛṣṭvā vānarapuṃgavānniryāya kapiśārdūlo hanūmānparyavasthitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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