महाभारत 3.272.14
तमङ्गदो वालिसुतः श्रीमानुद्यम्य पादपम्अभिद्रुत्य महावेगस्ताडयामास मूर्धनि
tamaṅgado vālisutaḥ śrīmānudyamya pādapamabhidrutya mahāvegastāḍayāmāsa mūrdhani
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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