महाभारत 3.272.19
ततो हताश्वात्प्रस्कन्द्य रथात्स हतसारथिःतत्रैवान्तर्दधे राजन्मायया रावणात्मजः
tato hatāśvātpraskandya rathātsa hatasārathiḥtatraivāntardadhe rājanmāyayā rāvaṇātmajaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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