महाभारत 3.272.26
तौ शरैराचितौ वीरौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौपेततुर्गगनाद्भूमिं सूर्याचन्द्रमसाविव
tau śarairācitau vīrau bhrātarau rāmalakṣmaṇaupetaturgaganādbhūmiṃ sūryācandramasāviva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें