Loading
महाभारत 3.273.26
स पुत्रं निहतं दृष्ट्वा त्रासात्संभ्रान्तलोचनःरावणः शोकमोहार्तो वैदेहीं हन्तुमुद्यतः
sa putraṃ nihataṃ dṛṣṭvā trāsātsaṃbhrāntalocanaḥrāvaṇaḥ śokamohārto vaidehīṃ hantumudyataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें