महाभारत 3.274.3
तमाद्रवन्तं संक्रुद्धं मैन्दनीलनलाङ्गदाःहनूमाञ्जाम्बवांश्चैव ससैन्याः पर्यवारयन्
tamādravantaṃ saṃkruddhaṃ maindanīlanalāṅgadāḥhanūmāñjāmbavāṃścaiva sasainyāḥ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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