महाभारत 3.277.22
राजपुत्र्यां तु गर्भः स मालव्यां भरतर्षभव्यवर्धत यथा शुक्ले तारापतिरिवाम्बरे
rājaputryāṃ tu garbhaḥ sa mālavyāṃ bharatarṣabhavyavardhata yathā śukle tārāpatirivāmbare
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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