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महाभारत 3.277.26
तां सुमध्यां पृथुश्रोणीं प्रतिमां काञ्चनीमिवप्राप्तेयं देवकन्येति दृष्ट्वा संमेनिरे जनाः
tāṃ sumadhyāṃ pṛthuśroṇīṃ pratimāṃ kāñcanīmivaprāpteyaṃ devakanyeti dṛṣṭvā saṃmenire janāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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