महाभारत 3.277.2
द्यूते दुरात्मभिः क्लिष्टाः कृष्णया तारिता वयम्जयद्रथेन च पुनर्वनादपहृता बलात्
dyūte durātmabhiḥ kliṣṭāḥ kṛṣṇayā tāritā vayamjayadrathena ca punarvanādapahṛtā balāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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