महाभारत 3.277.39
सा हैमं रथमास्थाय स्थविरैः सचिवैर्वृतातपोवनानि रम्याणि राजर्षीणां जगाम ह
sā haimaṃ rathamāsthāya sthaviraiḥ sacivairvṛtātapovanāni ramyāṇi rājarṣīṇāṃ jagāma ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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