महाभारत 3.279.12
अनुरूपो हि संयोगे त्वं ममाहं तवापि चस्नुषां प्रतीच्छ मे कन्यां भार्यां सत्यवतः सुताम्
anurūpo hi saṃyoge tvaṃ mamāhaṃ tavāpi casnuṣāṃ pratīccha me kanyāṃ bhāryāṃ satyavataḥ sutām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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