महाभारत 3.28.10
इदं च शयनं दृष्ट्वा यच्चासीत्ते पुरातनम्शोचामि त्वां महाराज दुःखानर्हं सुखोचितम्
idaṃ ca śayanaṃ dṛṣṭvā yaccāsītte purātanamśocāmi tvāṃ mahārāja duḥkhānarhaṃ sukhocitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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