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महाभारत 3.28.13
या त्वाहं चन्दनादिग्धमपश्यं सूर्यवर्चसम्सा त्वा पङ्कमलादिग्धं दृष्ट्वा मुह्यामि भारत
yā tvāhaṃ candanādigdhamapaśyaṃ sūryavarcasamsā tvā paṅkamalādigdhaṃ dṛṣṭvā muhyāmi bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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