महाभारत 3.28.19
भीमसेनमिमं चापि दुःखितं वनवासिनम्ध्यायन्तं किं न मन्युस्ते प्राप्ते काले विवर्धते
bhīmasenamimaṃ cāpi duḥkhitaṃ vanavāsinamdhyāyantaṃ kiṃ na manyuste prāpte kāle vivardhate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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