Loading
महाभारत 3.28.21
सत्कृतं विविधैर्यानैर्वस्त्रैरुच्चावचैस्तथातं ते वनगतं दृष्ट्वा कस्मान्मन्युर्न वर्धते
satkṛtaṃ vividhairyānairvastrairuccāvacaistathātaṃ te vanagataṃ dṛṣṭvā kasmānmanyurna vardhate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें