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महाभारत 3.280.17
सावित्र्युवाचअस्तं गते मयादित्ये भोक्तव्यं कृतकामयाएष मे हृदि संकल्पः समयश्च कृतो मया
sāvitryuvācaastaṃ gate mayāditye bhoktavyaṃ kṛtakāmayāeṣa me hṛdi saṃkalpaḥ samayaśca kṛto mayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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