महाभारत 3.281.61
सा भूमौ प्रेक्ष्य भर्तारमुपसृत्योपगूह्य चउत्सङ्गे शिर आरोप्य भूमावुपविवेश ह
sā bhūmau prekṣya bhartāramupasṛtyopagūhya cautsaṅge śira āropya bhūmāvupaviveśa ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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