महाभारत 3.282.19
धौम्य उवाच · dhaumya uvāca
सर्वैर्गुणैरुपेतस्ते यथा पुत्रो जनप्रियःदीर्घायुर्लक्षणोपेतस्तथा जीवति सत्यवान्
sarvairguṇairupetaste yathā putro janapriyaḥdīrghāyurlakṣaṇopetastathā jīvati satyavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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