महाभारत 3.282.23
समागमेन पुत्रस्य सावित्र्या दर्शनेन चचक्षुषश्चात्मनो लाभात्त्रिभिर्दिष्ट्या विवर्धसे
samāgamena putrasya sāvitryā darśanena cacakṣuṣaścātmano lābhāttribhirdiṣṭyā vivardhase
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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