महाभारत 3.282.29
संतापितः पिता माता वयं चैव नृपात्मजनाकस्मादिति जानीमस्तत्सर्वं वक्तुमर्हसि
saṃtāpitaḥ pitā mātā vayaṃ caiva nṛpātmajanākasmāditi jānīmastatsarvaṃ vaktumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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