महाभारत 3.284.10
कर्ण मद्वचनं तात शृणु सत्यभृतां वरब्रुवतोऽद्य महाबाहो सौहृदात्परमं हितम्
karṇa madvacanaṃ tāta śṛṇu satyabhṛtāṃ varabruvato'dya mahābāho sauhṛdātparamaṃ hitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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