महाभारत 3.284.18
यदि दास्यसि कर्ण त्वं सहजे कुण्डले शुभेआयुषः प्रक्षयं गत्वा मृत्योर्वशमुपेष्यसि
yadi dāsyasi karṇa tvaṃ sahaje kuṇḍale śubheāyuṣaḥ prakṣayaṃ gatvā mṛtyorvaśamupeṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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