महाभारत 3.284.23
कर्ण उवाच · karṇa uvāca
श्रेय एव ममात्यन्तं यस्य मे गोपतिः प्रभुःप्रवक्ताद्य हितान्वेषी शृणु चेदं वचो मम
śreya eva mamātyantaṃ yasya me gopatiḥ prabhuḥpravaktādya hitānveṣī śṛṇu cedaṃ vaco mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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