महाभारत 3.284.7
महार्हे शयने वीरं स्पर्ध्यास्तरणसंवृतेशयानमभिविश्वस्तं ब्रह्मण्यं सत्यवादिनम्
mahārhe śayane vīraṃ spardhyāstaraṇasaṃvṛteśayānamabhiviśvastaṃ brahmaṇyaṃ satyavādinam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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