महाभारत 3.286.20
ततस्तत्त्वमिति ज्ञात्वा राधेयः परवीरहाशक्तिमेवाभिकाङ्क्षन्वै वासवं प्रत्यपालयत्
tatastattvamiti jñātvā rādheyaḥ paravīrahāśaktimevābhikāṅkṣanvai vāsavaṃ pratyapālayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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