महाभारत 3.289.4अन्नादिसमुदाचारः शय्यासनकृतस्तथादिवसे दिवसे तस्य वर्धते न तु हीयतेannādisamudācāraḥ śayyāsanakṛtastathādivase divase tasya vardhate na tu hīyateइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें