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महाभारत 3.29.30
मृदुना मार्दवं हन्ति मृदुना हन्ति दारुणम्नासाध्यं मृदुना किंचित्तस्मात्तीक्ष्णतरो मृदुः
mṛdunā mārdavaṃ hanti mṛdunā hanti dāruṇamnāsādhyaṃ mṛdunā kiṃcittasmāttīkṣṇataro mṛduḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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