महाभारत 3.29.3
क्षमा स्विच्छ्रेयसी तात उताहो तेज इत्युतएतन्मे संशयं तात यथावद्ब्रूहि पृच्छते
kṣamā svicchreyasī tāta utāho teja ityutaetanme saṃśayaṃ tāta yathāvadbrūhi pṛcchate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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