महाभारत 3.29.4
श्रेयो यदत्र धर्मज्ञ ब्रूहि मे तदसंशयम्करिष्यामि हि तत्सर्वं यथावदनुशासनम्
śreyo yadatra dharmajña brūhi me tadasaṃśayamkariṣyāmi hi tatsarvaṃ yathāvadanuśāsanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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