महाभारत 3.290.18
एते हि विबुधाः सर्वे पुरंदरमुखा दिवित्वया प्रलब्धं पश्यन्ति स्मयन्त इव भामिनि
ete hi vibudhāḥ sarve puraṃdaramukhā divitvayā pralabdhaṃ paśyanti smayanta iva bhāmini
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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