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महाभारत 3.290.23
मया मन्त्रबलं ज्ञातुमाहूतस्त्वं विभावसोबाल्याद्बालेति कृत्वा तत्क्षन्तुमर्हसि मे विभो
mayā mantrabalaṃ jñātumāhūtastvaṃ vibhāvasobālyādbāleti kṛtvā tatkṣantumarhasi me vibho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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