महाभारत 3.290.3
एवं संचिन्तयन्ती सा ददर्शर्तुं यदृच्छयाव्रीडिता साभवद्बाला कन्याभावे रजस्वला
evaṃ saṃcintayantī sā dadarśartuṃ yadṛcchayāvrīḍitā sābhavadbālā kanyābhāve rajasvalā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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