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महाभारत 3.294.20
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
ततः कर्णः प्रहृष्टस्तु उपसंगम्य वासवम्अमोघां शक्तिमभ्येत्य वव्रे संपूर्णमानसः
tataḥ karṇaḥ prahṛṣṭastu upasaṃgamya vāsavamamoghāṃ śaktimabhyetya vavre saṃpūrṇamānasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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