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महाभारत 3.295.2
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
एवं हृतायां कृष्णायां प्राप्य क्लेशमनुत्तमम्विहाय काम्यकं राजा सह भ्रातृभिरच्युतः
evaṃ hṛtāyāṃ kṛṣṇāyāṃ prāpya kleśamanuttamamvihāya kāmyakaṃ rājā saha bhrātṛbhiracyutaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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