महाभारत 3.295.3
पुनर्द्वैतवनं रम्यमाजगाम युधिष्ठिरःस्वादुमूलफलं रम्यं मार्कण्डेयाश्रमं प्रति
punardvaitavanaṃ ramyamājagāma yudhiṣṭhiraḥsvādumūlaphalaṃ ramyaṃ mārkaṇḍeyāśramaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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