महाभारत 3.295.8अरणीसहितं मह्यं समासक्तं वनस्पतौमृगस्य घर्षमाणस्य विषाणे समसज्जतaraṇīsahitaṃ mahyaṃ samāsaktaṃ vanaspataumṛgasya gharṣamāṇasya viṣāṇe samasajjataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें